जमीन मापी को लेकर आमरण अनशन शुरू

अपनी जमीन के लिए 30 वर्षों से भटक रहा 18 दलित परिवार
मेदिनीनगर : पलामू के पाटन प्रखंड के शोले गांव के 18 भूमिहीन दलित परिवारों को 1987 में बिहार सरकार ने जमीन का पट्टा दिया था, लेकिन आज तक उक्त जमीन दलित परिवारों को नहीं मिली है.
दलित भूमिहीन परिवार प्रशासन की तरफ से मिली जमीन की मापी के लिए पिछले 30 वर्षों से परेशान है, लेकिन आज तक उनकी परेशानी दूर नहीं हुई है. जमीन की मापी को लेकर दलित परिवारों ने गुरुवार को उपायुक्त कार्यालय के समीप अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू किया. इसके पूर्व उन्होंने 11 जनवरी को पाटन अंचल पदाधिकारी को ज्ञापन देकर कहा था कि यदि 31 जनवरी तक जमीन की मापी करा उनलोगों को नहीं दिलायी गयी, तो 15 फरवरी से वे लोग उपायुक्त कार्यालय के समीप धरना देंगे.
इसके बावजूद प्रखंड प्रशासन द्वारा उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया. अनशन पर बैठने वालों में श्याम बिहारी मोची, राजेश मांझी, हुलास भुइयां, जगरनाथ मांझी व बैजनाथ मोची शामिल हैं. इधर, अपनी जमीन की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे लोगों का नैतिक समर्थन भाकपा के राज्य सचिव केडी सिंह व झारखंड दिहाड़ी मजदूर यूनियन के राजीव कुमार ने किया है. नेता द्वय का कहना है कि प्रशासन को इस मांग को गंभीरता से लेना चाहिए. प्रशासन की संवेदनहीनता से यह स्थिति बनी है. भाकपा माले के रवींद्र भुइयां, ब्रज नंदन स्नेही, शब्बीर अहमद, गौतम चटर्जी, राजकुमार, सैनुल अंसारी, गणेश रवि, शंभु सिंह, चेरो, जमालुद्दीन आदि ने अनशनकारियों को समर्थन दिया है.
खेती-बारी करने के लिए मिली थी जमीन
अनशन पर बैठे  राजेश मांझी व श्याम बिहारी मोची का कहना था कि खेती-बारी करने के लिए उनलोगों को जमीन मिली थी. लेकिन जमीन का पट्टा मिलने के बाद उनलोगों की समस्या दूर होने के बावजूद और बढ़ गयी. उनलोगों ने कहा कि हमलोग लोग पिछले 30 साल से जमीन पर कब्जा के लिए परेशान है. इस दौरान कई अंचल पदाधिकारियों की पदस्थापना हुई, लेकिन किसी ने इस समस्या को दूर करने के लिए पहल नहीं की. इसलिए उनलोगों ने उपायुक्त के समक्ष गुहार लगाने के लिए अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया है.
इन परिवारों को मिला था जमीन का पट्टा
श्याम बिहारी मोची, शिवनाथ मोची, सरस्वती कुंवर, वैजनाथ मोची, रामनाथ मोची, जगरनाथ मांझी, चैतू मोची, करम मोची, निर्मल भुइयां, जमुना भुइयां, मालिक भुइयां, कन्हाइ भुइयां, हरि मोची आदि के नाम शामिल हैं.

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