कला / संस्कृति

#100 Women: एक दलित लेखिका का ‘अपना कोना’ / कौशल पंवार

वर्जीनिया वुल्फ की किताब ‘A Room of One’s Own’ का प्रकाशन 1929 में हुआ था, उसका केन्द्रीय स्वर है कि एक स्त्री का अपने लेखन के लिए अपना कमरा होना चाहिए, अपने निज को सुरक्षित रखने के लिए भी अपना कमरा, इसके लिए उसकी आर्थिक स्वतंत्रता जरूरी है. 8 घंटे ...

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पर्दे के पीछे भी है दलितों का दमदार रोल

कबाली फिल्म के प्रोडक्शन क्रू के ज्यादातर मेंबर दलित हैं। डायरेक्टर पा.रंजीत, सिनेमैटोग्रफर जी.मुरली से लेकर आर्ट एंड कस्ट्यूम डायरेक्टर था.रामालिंगम तक सभी दलित समाज से हैं. रजनीकांत   लंबे इंतजार के बाद फाइनली सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्म कबाली रिलीज हो गई है। फिल्म के पहले रजनीकांत किताब पढ़ रहे ...

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वर्ण व्यवस्था पर कटाक्ष करता नाटक “‘उम्र पैंतालिस बतायी गई थी”

नाटक ‘उम्र पैंतालिस बतायी गई थी का मंचन का वर्ण व्यवस्था पर कटाक्ष किया गया। सुब्रत राय के निर्देशन में हुए मंचन दिखाया गया कि गांव में बरगद के नीचे लगने वाली पाठशाला में विद्यार्थियों को उनकी कक्षा के अनुसार नहीं बल्कि जाति के हिसाब से बैठना होता है। जहां ...

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हिंदी: दलित साहित्य की 10 श्रेष्ठ रचनाएँ

ओम प्रकाश वाल्मीकि साहित्यकार 16 सितंबर 2013 हिंदी साहित्य में दलितों के जीवन को केंद्र में रखकर अनेक किताबें लिखी गई हैं. मैंने उनमें से कुछ वैसी किताबों को यहां शामिल किया है जिनमें दलित जीवन की सच्चाई बेहद यथार्थवादी नज़रिए से अभिव्यक्त हुई है. 1. जूठन (आत्मकथा)- ओम प्रकाश ...

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ऊंची जाति किस तरह करती है महिलाओं का शोषण उसे दिखती है जीवी अय्यर की फिल्म इष्टि

रामाविक्रमन का छोटा भाई नारायणन हर रात नीची जाति की स्त्रियों के पास जाता है और कभी-कभी बूढ़े नंबूदरियों की जवान पत्नियों को भी संतुष्ट करता है। उन्हीं स्त्रियों में से एक से जन्मा नारायणन का बच्चा इलाज न करा पाने से मर जाता है क्योंकि रामाविक्रमन उसे यह कहते ...

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