लेख

उपेक्षित हैं दलित, कौन छीन रहा उनका अधिकार आप भी जानें

उपेक्षीय हैं दलित, कौन छीन रहा उनका अधिकार ? इस प्रश्न के साथ एक बार फिर से दलित, वंचित वर्ग के नेताओं ने आवाज बुलंद कर दिया है। धीरे धीरे जो कुछ अब सतह पर आ रहा है वह एनडीए और नीतीश कुमार की जदयू के लिए शुभ नहीं है। ...

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दलित उत्पीड़न के इतिहास को बताया मोहन नैमिशराय ने

पीयूके हिंदी विभाग में रू-ब-रू कार्यक्रम के तहत वरिष्ठ साहित्यकार मोहन नैमिशराय ने शिरकत की। उन्होंने दलित आंदोलन की पृष्ठभूमि को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभाने वाले बाबा अंबेडकर और फुले के प्रयासों के बारे में बताया। उन्होंने भारतीय परिवेश में दलित उत्पीड़न के इतिहास को साझा किया। मोहन ...

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आंबेडकर की प्रतीक्षा में समाज

कुमार प्रशांत गांधीवादी विचारक किसी-न-किसी को यह हिसाब लगाना चाहिए कि भारतीय समाज में बाबसाहेब अांबेडकर ने अपनी दलित पहचान को हथियार बनाकर जो राजनीतिक सफर शुरू किया था, वह इतने वर्षों में कहां पहुंचा है अौर अब अाज इसकी संभावनाएं कितनी बची हैं अौर कितनी सिद्ध हुई लगती हैं! ...

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जातिवाद की कीमत चुकाता विकास

दलित उत्पीड़न हो या महिलाओं के साथ भेदभाव, इसका सीधा संबंध विकास से नहीं है। पिछड़े इलाकों में भी भेदभाव कम और विकसित क्षेत्रों में ज्यादा भी हो सकता है। अगर हम हाल में घटी कुछ घटनाओं का विश्लेषण करें तो यह बात प्रमाणिकता से कही जा सकती है। बीते ...

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वंचितों की व्यापक बराबरी का सवाल – बद्री नारायण

आज की राजनीतिक गोलबंदी एवं सत्ता की राजनीति के केंद्रीय शब्द हैं ‘अस्मिता की चाह और ‘विकास। जब ‘अस्मिता की चाह पर चर्चा होती है तो सामाजिक एवं राजनीतिक अस्मिता की बात होती है, परंतु किसी भी सामाजिक समूह के ‘अस्मिता निर्माण की प्रक्रिया में ‘धर्म की क्या भूमिका होती ...

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