लेख

कौन सुनता है उनकी बात

भारतीय लोकतंत्र को एक सक्षम लोकतंत्र माना जाता है, लेकिन यह अंतर्विरोधों से भी भरा हुआ है। इसकी एक विडंबना यह है कि भारतीय जनता का एक वर्ग जहां अति मुखर है, वहीं उसका एक बड़ा वर्ग ‘मूक व चुप समुदाय’ के रूप में समाज में रहता है। भारतीय समाज ...

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‘क्या आर्य वैश्यों के पास कोई ऐसा अर्थशास्त्री नहीं है, जो मेरी किताब पर तर्क कर सके?’

हैदराबाद की मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले कांचा इलैया शेपहर्ड ने अपनी किताब ‘व्हाई आई एम नॉट अ हिंदू’ में जातिवादी व्यवस्था पर एक तीखी टिप्पणी की थी. इस बार विवाद उनकी 2009 में लिखी किताब ‘पोस्ट-हिंदू इंडिया’ को लेकर है. इस किताब में विभिन्न जातियों के ...

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जात-पात का विरोध

यह शुभ संकेत है कि भाजपा ने राज्य में जात-पात के खिलाफ अभियान चलाने का निश्चय किया है यद्यपि यह स्पष्ट होना बाकी है कि इसके पीछे पार्टी की मंशा क्या है। यदि भाजपा ने बिहार को जातिवाद के कलंक से मुक्ति दिलाने, सामाजिक सद्भाव बढ़ाने तथा राज्य की छवि ...

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प्राचीन मंदिरों में पुजारियों के चयन में आरक्षण लागू, 62 में से 36 पद SC/ST के लिए

तिवरंतपुरम: केरल में अति प्राचीन 1284 मंदिरों में पुजारियों के चयन में आरक्षण लागू हो गया है। पहली नियुक्ति प्रक्रिया समपन्न हो गई जिसमें 62 पुजारियों का चयन किया गया। इसमें 36 पद आरक्षित थे जिन पर दलित एवं पिछड़ा वर्ग जाति के लोगों को नियुक्त किया गया। बता दें कि ...

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गैर-आदिवासी को आदिवासी बनाने की कुचेष्टा क्यों

इन दिनों समाचार पत्रों एवं टी​वी पर प्रसारित समाचारों से यह जानकर अत्यंत दुख हुआ कि गुजरात में लंबे समय से गैर आदिवासियों को आदिवासी सूची में शामिल करने की कुचेष्टाएं चल रही हैं। राजनीति लाभ के लिये इस तरह आदिवासी जनजाति के अधिकारों एवं उनके लिये बनी लाभकारी योजनाओं ...

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